देहरादून, 03 जून 2026: आईसीएआर-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून में बुधवार से जलागम प्रबंधन (Watershed Management) के क्षेत्र में दो विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत हुई है। संस्थान के जल विज्ञान एवं अभियांत्रिकी प्रभाग द्वारा आयोजित इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग के छात्रों के तकनीकी ज्ञान और व्यावहारिक कौशल को मजबूत करना है।
दो अलग-अलग श्रेणियों में प्रशिक्षण
संस्थान ने छात्रों की योग्यता के अनुसार दो स्तरों पर ट्रेनिंग प्रोग्राम डिजाइन किए हैं:
बी.टेक. छात्रों के लिए (4 सप्ताह): “जलागम प्रबंधन हेतु मृदा एवं जल संरक्षण पर कौशल विकास कार्यक्रम”। इसमें छात्रों को मृदा एवं जल संरक्षण उपायों, सतत भूमि प्रबंधन और जलागम विकास का व्यावहारिक अनुभव दिया जा रहा है।
एम.टेक. छात्रों के लिए (1 माह): “जलागम प्रबंधन हेतु उन्नत भू-स्थानिक तकनीकें एवं जलवैज्ञानिक मॉडलिंग”। इस कार्यक्रम के तहत छात्रों को उन्नत भू-स्थानिक तकनीकों, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस (GIS) उपकरणों और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग के प्रभावी उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी।
प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन पर जोर
उद्घाटन सत्र के दौरान आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी के निदेशक डॉ. बी. पी. भट्ट ने प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन में मिट्टी और पानी के संरक्षण को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे जलागम नियोजन के लिए एक बहु-विषयक (multi-disciplinary) दृष्टिकोण अपनाएं।
वहीं, पाठ्यक्रम निदेशक और जल विज्ञान एवं अभियांत्रिकी प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. अम्बरीश कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा पेश की। उन्होंने बढ़ते भूमि क्षरण, जल सुरक्षा और सतत कृषि की चुनौतियों से निपटने में वैज्ञानिक जलागम प्रबंधन की भूमिका को रेखांकित किया और युवा पेशेवरों से इस ट्रेनिंग का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पहुंचे 44 छात्र
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए देश के अलग-अलग कोनों से कुल 44 छात्रों ने पंजीकरण कराया है, जिसमें 32 बी.टेक. और 12 एम.टेक. के छात्र शामिल हैं।
प्रतिभागी संस्थानों में प्रमुख नाम:
बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU), वाराणसी, उत्तर प्रदेश
नॉर्थ ईस्टर्न रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, अरुणाचल प्रदेश
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर कृषि अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, इटावा, उत्तर प्रदेश
नवसारी कृषि विश्वविद्यालय, गुजरात
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार
विभिन्न राज्यों से आए छात्रों की यह बड़ी भागीदारी देश में प्राकृतिक संसाधन संरक्षण के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि को दर्शाती है। इस ट्रेनिंग से छात्रों को समकालीन तकनीकों और जमीनी हकीकतों को समझने का मौका मिलेगा। उद्घाटन सत्र का सफल समन्वय वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रामा पाल और वैज्ञानिक डॉ. वेंकटेश ने किया, जिसमें तकनीकी अधिकारी एच. एस. भाटिया और सी. एम. बिष्ट ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।



