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Doon Mail > Blog > उत्तराखंड > शोध का लाभ किसानों तक पहुंचाना और मिट्टी की सेहत सुधारना प्राथमिकता: डॉ. बी.पी. भट्ट
उत्तराखंड

शोध का लाभ किसानों तक पहुंचाना और मिट्टी की सेहत सुधारना प्राथमिकता: डॉ. बी.पी. भट्ट

Gaurav Mishra
Last updated: May 7, 2026 1:47 pm
Gaurav Mishra
Published: May 7, 2026
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ICAR-IISWC के नये निदेशक डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने संभाला कार्यभार,. पत्रकारों से वार्ता में बताईं प्राथमिकताएं

Contents
जलवायु परिवर्तन और खेती पर मंडराता खतराविकास और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ पर जोरविशेषज्ञों ने साझा की उपलब्धियाँ

देहरादून, 07 मई, 2026। भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के नवनियुक्त निदेशक डॉ. भगवती प्रसाद भट्ट ने कहा है कि संस्थान में चल रहे नवीन शोध और अध्ययनों का सीधा लाभ प्रदेश के किसानों, बागवानों और आम जनमानस तक पहुँचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। संस्थान परिसर में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और जल संपदा का संरक्षण कर प्रदेशवासियों को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जाएगा।

जलवायु परिवर्तन और खेती पर मंडराता खतरा

निदेशक डॉ. भट्ट ने वर्तमान चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन ने जीवन और आजीविका के सामने कई गंभीर संकट खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड के संदर्भ में उन्होंने बताया:

  • वर्षा चक्र में बदलाव: बारिश के पैटर्न और समयावधि में जबरदस्त बदलाव आया है। अब कम समय में अत्यधिक वर्षा (Cloudburst जैसी स्थितियाँ) हो रही है, जबकि रिमझिम बारिश का दौर कम हुआ है।
  • मिट्टी और भूजल का संकट: मूसलाधार बारिश के कारण मिट्टी का कटाव और पानी का बहाव बढ़ा है, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
  • मिट्टी की सेहत: खेती और बागवानी की मिट्टी की उर्वरकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, जिसे सुधारने के लिए संस्थान राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगा।

विकास और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ पर जोर

संस्थान के भविष्य के लक्ष्यों को साझा करते हुए डॉ. भट्ट ने कहा कि हमारा उद्देश्य टिकाऊ विकास (Sustainable Development) सुनिश्चित करना है।

  • आय में वृद्धि: तकनीक और नवीन शोध के माध्यम से किसानों के उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाकर उनकी आय में इजाफा किया जाएगा।
  • बंजर भूमि का उपचार: खराब हो चुकी भूमि को फिर से उत्पादक और लाभकारी बनाने पर काम चल रहा है।
  • रिवर्स माइग्रेशन: पलायन रोकने और ‘रिवर्स माइग्रेशन’ को बढ़ावा देने के लिए संस्थान उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहाँ खेती बंद हो गई है और ‘लैंड यूज’ बदलने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है।
  • मानव-वन्यजीव संघर्ष: इस गंभीर समस्या को रोकने के लिए भी संस्थान प्रदेश सरकार के साथ समन्वय कर प्रभावी कदम उठा रहा है।

विशेषज्ञों ने साझा की उपलब्धियाँ

इस अवसर पर संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों— डॉ. चरण सिंह, डॉ. डी.वी. सिंह, डॉ. जगमोहन सिंह तोमर, डॉ. बांके बिहारी, डॉ. उदय मंडल और इंजीनियर अमित चौहान ने भी अपने-अपने विभागों की उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की।

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