देहरादून, 4 जून, 2026ः उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में पशुपालन व्यवसाय से जुड़े डेयरी और गौशाला संचालकों के सामने इस समय गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लगातार बढ़ती महंगाई और विशेष रूप से पशुओं के चारे (भूसे) की आसमान छूती कीमतों के कारण अब पशुपालकों के लिए इस व्यवसाय को चला पाना लगभग असंभव साबित हो रहा है।
इस गंभीर समस्या को लेकर ‘डेयरी यूनियन, देहरादून’ के पदाधिकारियों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप और राहत की मांग की है।
मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र के अनुसार, अकेले देहरादून जिले में 4,000 से अधिक डेयरी संचालक हैं। इनमें से अधिकतर पशुपालक ऐसे हैं, जो कई पीढ़ियों से इस व्यवसाय को स्वरोजगार और अपने मुख्य पेशे के रूप में अपनाए हुए हैं। पत्र में कहा गया, बदलते हालातों और बढ़ती लागत के कारण अब इस व्यवसाय को जारी रखने में खुद को पूरी तरह असमर्थ पा रहे हैं।
भूसे की किल्लत और बाहरी राज्यों पर निर्भरता
डेयरी यूनियन के पदाधिकारियों ने समस्या की मुख्य वजह पर प्रकाश डाला है। पत्र के अनुसार:
पिछले एक वर्ष से भूसे की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो रही है, जिससे डेयरी संचालन का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
उत्तराखंड में चारे की भारी कमी है, जिसके कारण पशुपालक पूरी तरह से पंजाब और हरियाणा से आने वाले भूसे (आयात) पर निर्भर हैं।
पदाधिकारियों का आरोप है कि इस संकट के पीछे औद्योगिक नीतियां भी जिम्मेदार हैं, जिसकी वजह से स्थानीय स्तर पर पशुओं के लिए चारा महंगा होता जा रहा है।
डेयरी यूनियन ने चेताया: “अगर भूसे की कीमतों और उपलब्धता को लेकर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो देहरादून का डेयरी उद्योग पूरी तरह ठप हो जाएगा, जिससे हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।” डेयरी यूनियन, देहरादून के अध्यक्ष देशराज वालिया और सचिव ने इस पत्र के माध्यम से सरकार से मांग की है कि इस दिशा में जल्द से जल्द कोई ठोस और सकारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि पशुपालकों और गौशालाओं को इस आर्थिक मंदी से उबारा जा सके।



