देहरादून, 119 जून, 2026ः आईसीएआर-आईआईएसडब्ल्यूसी, देहरादून ने जनजातीय उप-योजना (टीएसपी) के तहत संतुलित खाद के इस्तेमाल और मिट्टी की सेहत के प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कालसी ब्लॉक में ‘ग्राम प्रधान सम्मेलन’ और किसान गोष्ठी का आयोजन किया।
राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान-2026’ के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारी, 32 ग्राम प्रधान और फटेऊ व इच्छला गांव के 79 किसान (52 पुरुष और 27 महिलाएं) शामिल हुए। सीनियर टेक्निकल असिस्टेंट मुदित मिश्रा, तकनीकी अधिकारी हुकुम सिंह ने किसानों को टीएसपी गतिविधियों और मिट्टी व पानी के संरक्षण के तरीकों के बारे में जानकारी दी।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रमन जीत सिंह ने मिट्टी की सेहत बनाए रखने, खेती की लागत कम करने और इंसानी सेहत की सुरक्षा के लिए रासायनिक खाद के सही इस्तेमाल के साथ-साथ खाद, कम्पोस्ट, फसल के अवशेषों की री साइक्लिंग, बायो-फर्टिलाइजर और वेस्ट डीकंपोजर के मिले-जुले इस्तेमाल से खेतों की फसलों में संतुलित खाद के महत्व पर जोर दिया।
टेक्नीशियन अजीत राणा ने पर्वतीय इलाकों में सब्जियों की खेती में जैविक और प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने के फ़ायदों के बारे में बताया।
प्रतिभागियों ने उत्तराखंड के आदिवासी इलाकों में टिकाऊ खेती के तरीकों को बढ़ावा देने में सामुदायिक भागीदारी के महत्व पर चर्चा की।
इस कार्यक्रम में ग्राम पंचायत प्रधान, किसानों और वैज्ञानिकों को एक साथ लाया गया, ताकि मिट्टी की सेहत सुधारने और केमिकल फर्टिलाइजर पर निर्भरता कम करने के व्यावहारिक समाधानों पर चर्चा की जा सके।
किसानों के प्रतिनिधियों ब्लॉक प्रमुख सावित्री चौहान, ज्येष्ठ उप प्रमुख मीरा राठौर, कनिष्ठ उप प्रमुख प्रियंका चौहान और चरण सिंह अध्यक्ष, अजय सिंह चौहान (ग्राम प्रधान, इछला) ने कालसी ब्लॉक में खेती से जुड़ी समस्याओं को उजागर किया।
बैठक में किसान रविंदर चौहान, जयपाल चौहान, केसर सिंह, संत राम, उर्मिला चौहान, नेहा चौहान और सुनीता चौहान भी मौजूद थे।
इस अवसर पर मक्के की एलक्यूएमएच-1 किस्म का निरीक्षण किया गया। मक्के के बीज आईसीएआर-भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना ने उपलब्ध कराए थे। इस प्रोग्राम का समन्वय डॉ. रमन जीत सिंह ने जनजातीय उप-योजना समन्वयक डॉ. अशोक कुमार (प्रधान वैज्ञानिक) और संस्थान के निदेशक डॉ. बी.पी. भट्ट के मार्गदर्शन में किया।



