अध्यक्ष डा. महेश कुड़ियाल व सेक्रेटरी डा. अंकित पाराशर की पत्रकार वार्ता
देहरादून, 15 जून, 2026ः इंडियन मेडिकल एसोसिएशन देहरादून इकाई चिकित्सकों, मरीजों के कल्याण के लिए बहुस्तरीय कार्यक्रम चलाएगी। जन स्वास्थ्य, मेडिकल एजुकेशन और आम आदमी को बेहतर चिकित्सा प्रदान करने के लिए सकारात्मक अभियान चलाया जाएगा।
हरिद्वार मार्ग स्थित होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में आईएमए के प्रेसीडेंट डा. महेश कुड़ियाल, सेक्रेटरी डा. अंकित पाराशर, कोषाध्यक्ष डा. राहुल अवस्थी और डा.प्रवीण जिंदल ने कहा कि आईएमए की नई इकाई सकारात्मक अभियान चला रही है। चिकित्सकों की बेहतरी के लिए काम किया जाता रहेगा। प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य व चिकित्सा प्रदान करने के लिए छोटे बड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे। मरीजों व आम जन को जागरूक करने के लिए भी प्रोग्राम होते रहेंगे। सभी को बेहतरीन स्वास्थ्य व चिकित्सा सेवाएं कैसे मिलें इस दिशा में सरकार को सहयोग देंगे। सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए लोगों को स्कीमों की जानकारी भी प्रदान की जाएगी।
डा. महेश कुड़ियाल ने कहा कि चिकित्सकों के बारे में गलत नैरेटिव चलाया जा रहा है। इससे समाज में चिकित्सकों के बारे में गलत धारणा बन रही है। सुनियोजित साजिश के तहत यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि सभी व चिकित्सक मरीजों के दुश्मन व लुटेरे हैं। यह तथ्यों से परे है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। एसोसिएशन भी नियम कानून का उल्लंघन करने वाले चिकित्सकों के खिलाफ है। हम चाहते हैं कि इस तरह के चिकित्सकों को चिन्हित करके उनके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाए। लेकिन समूचे चिकित्सक समुदाय पर लांछन लगाना न्याय विरुद्ध है।
सेक्रेटरी डा. अंकित पाराशर ने बताया कि क्लिनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट में लचीलापन जरूरी है। अगर इसको ज्यों का त्यों लागू कर दिया गया तो अधिकतर नर्सिंग होम व क्लिनिक बंद हो जाएंगे। इससे योग्य चिकित्सक सेवाएं प्रदान करने में असमर्थ रहेंगे। अग्नि सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की दरकार है। इसमें समाधान पर फोकस होना चाहिए। कोषाध्यक्ष डा. राहुल अवस्थी ने कहा कि क्लिनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट की तमाम बातें अव्यवहारिक हैं। आम चिकित्सक इतनी पूंजी नहीं ला सकता है। पहाड़ी इलाकों के लिए तो ये और भी अव्यवहारिक है। अभी तक चिकित्सकों के लिए तमाम सेमिनार आयोजित किए गए हैं। आम लोगों को भी जागरूक करने की योजना है। अभी तक तीन सेमिनार किए गए हैं। पौधारोपण अभियान भी चलाया गया है।
डा. महेश कुड़ियाल ने कहा कि हम मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और सचिव से मुलाकात कर इस विषय पर एक ज्ञापन सौंपेंगे। साथ ही, इस कानून को किस तरह से व्यवाहारिक बनाया जाए उसके बारे में ड्राफ्ट भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा, पहाड़ी जिलों में संसाधनों की कमी है। वहां पर चिकित्सकों पर बहुत अधिक दबाव है। इस कारण केस रेफर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक ही साल्ट पर अलग अलग कंपनियों की दवाओं की अलग अलग कीमतें हैं। यह हर लिहाज से गलत है। सरकार को क्वालिटी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गरीब अमीर सभी मरीजों को बेहतरीन क्वालिटी की दवाओं की जरूरत होती है।



